मित्रों.. कुछ अपरिहार्य कारणों से मैं ब्लाग नहीं लिख पा रहा हूँ... रुकावट के लिए खेद है! आपसे निवेदन है कि कुछ दिनों के लिए मुझे क्षमा करें..
काश!
मेरेे तरह सब के दिलों में
बाहर की भांति
दिल की गहराइयों में
प्रेम ठहरने को
एक विशाल बंगला होता
जिसमें दरवाजे आंगन के साथ
बंद शयनकक्ष होता
जहाँ दो दिल मिल कर
गुपचुप बातें करते
उसी भांति चिर काल तक
करते रहते
जुदाई
जिसका नाम ना लेते
,यही मेरी कामना!!




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